सम्पूर्ण भारतीय रेलवे में अनेक अधिकारी अपने घरों पर चार से दस तक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से गैर कानूनी रूप से अपना घरेलू काम करवाते हैं. क्या ऐसा करना भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध है? यदि हाँ तो इन रेलवे के अफसर-अपराधियों को सजा कैसे दियाई जावे? विशेषकर तब जबकि, ऐसा कार्य करने वाले कर्मचारी न तो विरोध कर सकते हैं और न ही वे अपने अफसरों की शिकायत ही करने में समर्थ हैं? क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें अपनी नौकरी से निकाले जाने का खतरा रहता है. यहाँ सवाल यह भी है कि ये छोटे कर्मचारियों वेतन तो भारत सरकार से पाते है और हम सब जो टेक्स देते है, उससे ही इनको वेतन दिया जाता है, ऐसे में हम सभी देश के नागरिकों को भी तो इन अपराधी अफसरों के खिलाफ मुकदमा दायर करवाने का हक़ होना चाहिये. क्या ऐसा है? कृपया मार्गदर्शन करें. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
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