रविवार, 11 अक्टूबर 2009

बोलोगे नहीं तो कोई सुनेगा कैसे?

दुनियां में जितने भी अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, शोषण, उत्पीड़न, गैर-बराबरी आदि गैर कानूनी अपराध या मनमानियां होती हैं, उन सबके पीछे हमारी चुपचाप इन्हें सहते रहने की पुरानी, बल्कि जन्मजात आदत ही जिम्मेदार है। हमारे सुसुप्त मन में कहीं न कहीं एक डर समाया हुआ है। जब तक हम इससे मुक्ति नहीं पाएंगे, हम अपनी पहचान नही बना सकते। हम सम्मान एवं शान्ति के साथ अपने जीवन को नहीं जी सकते । इस बात को जानते हुए भी यदि हम चुपचाप अन्याय और अत्याचारों को सहते जा रहें हैं तो फ़िर हम सबका भगवान् ही मालिक है। ऐसे में हमें किसी से भी, किसी भी प्रकार की शिकायत करने का कोई हक़ नहीं है। लेकिन इससे काम नहीं चल सकता। हममें से अधिकांश अन्याय के खिलाफ खड़े होना तो चाहते हैं, लेकिन किसी का सपोर्ट नहीं मिल पाने के कारण हिम्मत जवाब दे जाती है। माना की समाज में भ्रष्टाचार एवं अत्याचार तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इन सबका मुकाबला करने वालों की संख्या भी तो बढ़ी है। आपके लिए भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) का राष्ट्रीय मंच उपलब्ध है। जो सबसे पहले लोगों को अपनी बात बोलना सिखाता है। क्योंकि "बोलोगे नहीं तो कोई सुनेगा कैसे?" इसलिए दोस्तों बोलो अपनी बात पुरी ताकत से बोलो। अन्यत्र कहीं नहीं बोल सकते तो इस ब्लॉग पर बोलो आपकी आवाज़ को ताकत देने के लिए हम हैं, भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के हजारों आजीवन सदस्य । लेकिन एक बात और सबसे पहले आप अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने की आदत डालो, तब ही आपको अधिकारों की मांग करने का नैतिक हक है। - आपका डॉ पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) ।

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